गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

शिविर : आओ अपने व्यक्तिमत्त्व को ढाले


आपके बच्चो ने जीवन में आज तक जो भी कमाया हैं. उससे भी ज्यादा क्षमता और ऊर्जा उसमे हैं परन्तु सुप्त अवस्था में हैं और यह उसे भी नहीं मालूम हैं. उसमे छिपी हुई प्रचंड उर्जा का इस्तेमाल उसका व समाज का जीवन समृद्ध करने के लिए हो सकता हैं. जरुरत हैं तो सिर्फ एक चिंगारी की, उस उर्जा को प्रज्वलित करने के लिए एक स्पार्क की. इसी स्पार्क के लिए आयोजित किए जाते हैं शिविर.

जीतने के लिए खुद को तैयार करने के लिए अपने गुणों की, शक्तिस्थानो की व क्षमता की सदैव खोज करनी पड़ती हैं और उन्हें प्रयत्नपूर्वक विकसित करना पड़ता हैं.  शिविर में शिबिरार्थी प्रत्यक्ष अनुभव के द्वारा जीतने के लिए खुद को विकसित करने का प्रयत्न करते हैं.

शिबिरार्थियों को विचार करने के लिए प्रवुत्त करने वाला, आत्मपरीक्षण, संवेदना तीक्ष्ण करनेवाला कृतिपूर्ण शिबिर हैं. आज के युग में चारो तरफ गुणों की स्पर्धा को पूर्णतः दूर करके जीतने के लिए खुद की खोज करनेवाला यह आनंददायी उपक्रम हैं.

शिबिर का स्वरुप कैसा होना चाहिए:  टाइट कार्यक्रम व डिसिप्लिन नही होना चाहिए. प्रातःकाल के दरम्यान सत्रों का आयोजन उचित प्रकार से होना चाहिए जिसकारण शिबिरार्थी का मन, शरीर, और वैचारिक विकास सम्बंधित प्रक्रियाएं होनी चाहिए. संध्याकाल का समय पूर्णतः विविध कार्य पूर्ण करने के लिए हो. दोपहर में वाचन, खेल, मुक्त चर्चा का कार्यक्रम हो. प्रत्यक्ष कृतिपुरक अनुभव देने वाले विविध प्रोजेक्ट शिबिरार्थी स्वतः पूर्ण करें. इसी आधार पर प्रत्येक प्रोजेक्ट में से क्या सिखा, इस विषय पर चर्चा व विश्लेषण द्वारा विचारो की स्पष्टता व प्रगल्भता अपने आप  प्रशिक्षनार्थी को हो जाएगी.

शिबिर का उद्देश्य : शिबिर पूर्ण करने पर शिबिरार्थी में  वर्तन  व परिवर्तन दिखे और उसमे वैचारिक स्पष्ठता का भी सृजन दिखाई पडे जिसकारण शिबिरार्थी का जीवन सकारात्मक तौर से आनंददायी हो सके.

जीवन का लक्ष्य? करियर कौनसे व कैसे चुनना चाहिए?  निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए खुद को कैसे तैयार करना चाहिए?  स्वतः में निहित गुण व् दोषों की खोज कैसे करनी हैं? अपने गुण और दोषों का निराकरण कैसे करे?
मानसिक बल तथा आत्मविश्वास को कैसे विकसित करे?
समय का उचित व्यवस्थापन किस प्रकार करे?
वाचन,  डायरी लेखन,  मुलाखत लेना
आहार व्यायाम विषयक संकल्पना की स्पष्ठता के लिए प्रात्यक्षिक
मार्केटिंग, व्यापार, पुस्तके विक्री, अपने से भी ज्यादा जरुरतमंद तथा दुखी लोगो को ढूँढना, विविध संस्था व उपक्रम को भेंट.

 सुचना: शिबिर की सहभाग  शुल्क : तथा भोजन -निवास व्यवस्था सह सभी प्रकार की व्यवस्था पूर्ण करके ही शिबिर में सहभागी होना चाहिए.
शिबिर शुरू होने के एक घंटा पहले ही शिबिर स्थान पर पहुंचे. शिबिर की समाप्ति के दिन तथा वापस लौटने का पूर्ण व्यवस्था के साथ ही शिबिर की शुरुआत करे.

साथ में आवश्यक वस्तुएं : खुद के कपडे, आवश्यक सामान, दवाई, दो चादरे, स्कार्फ/ टोपी, पानी की बोतल, नोटबुक, पेन, ग्लास, कटोरी, थाली, टूथपेस्ट, साबुन इत्यादि आवश्यक वस्तुए साथ में अवश्य रखे.

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गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

शिविर : आओ अपने व्यक्तिमत्त्व को ढाले


आपके बच्चो ने जीवन में आज तक जो भी कमाया हैं. उससे भी ज्यादा क्षमता और ऊर्जा उसमे हैं परन्तु सुप्त अवस्था में हैं और यह उसे भी नहीं मालूम हैं. उसमे छिपी हुई प्रचंड उर्जा का इस्तेमाल उसका व समाज का जीवन समृद्ध करने के लिए हो सकता हैं. जरुरत हैं तो सिर्फ एक चिंगारी की, उस उर्जा को प्रज्वलित करने के लिए एक स्पार्क की. इसी स्पार्क के लिए आयोजित किए जाते हैं शिविर.

जीतने के लिए खुद को तैयार करने के लिए अपने गुणों की, शक्तिस्थानो की व क्षमता की सदैव खोज करनी पड़ती हैं और उन्हें प्रयत्नपूर्वक विकसित करना पड़ता हैं.  शिविर में शिबिरार्थी प्रत्यक्ष अनुभव के द्वारा जीतने के लिए खुद को विकसित करने का प्रयत्न करते हैं.

शिबिरार्थियों को विचार करने के लिए प्रवुत्त करने वाला, आत्मपरीक्षण, संवेदना तीक्ष्ण करनेवाला कृतिपूर्ण शिबिर हैं. आज के युग में चारो तरफ गुणों की स्पर्धा को पूर्णतः दूर करके जीतने के लिए खुद की खोज करनेवाला यह आनंददायी उपक्रम हैं.

शिबिर का स्वरुप कैसा होना चाहिए:  टाइट कार्यक्रम व डिसिप्लिन नही होना चाहिए. प्रातःकाल के दरम्यान सत्रों का आयोजन उचित प्रकार से होना चाहिए जिसकारण शिबिरार्थी का मन, शरीर, और वैचारिक विकास सम्बंधित प्रक्रियाएं होनी चाहिए. संध्याकाल का समय पूर्णतः विविध कार्य पूर्ण करने के लिए हो. दोपहर में वाचन, खेल, मुक्त चर्चा का कार्यक्रम हो. प्रत्यक्ष कृतिपुरक अनुभव देने वाले विविध प्रोजेक्ट शिबिरार्थी स्वतः पूर्ण करें. इसी आधार पर प्रत्येक प्रोजेक्ट में से क्या सिखा, इस विषय पर चर्चा व विश्लेषण द्वारा विचारो की स्पष्टता व प्रगल्भता अपने आप  प्रशिक्षनार्थी को हो जाएगी.

शिबिर का उद्देश्य : शिबिर पूर्ण करने पर शिबिरार्थी में  वर्तन  व परिवर्तन दिखे और उसमे वैचारिक स्पष्ठता का भी सृजन दिखाई पडे जिसकारण शिबिरार्थी का जीवन सकारात्मक तौर से आनंददायी हो सके.

जीवन का लक्ष्य? करियर कौनसे व कैसे चुनना चाहिए?  निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए खुद को कैसे तैयार करना चाहिए?  स्वतः में निहित गुण व् दोषों की खोज कैसे करनी हैं? अपने गुण और दोषों का निराकरण कैसे करे?
मानसिक बल तथा आत्मविश्वास को कैसे विकसित करे?
समय का उचित व्यवस्थापन किस प्रकार करे?
वाचन,  डायरी लेखन,  मुलाखत लेना
आहार व्यायाम विषयक संकल्पना की स्पष्ठता के लिए प्रात्यक्षिक
मार्केटिंग, व्यापार, पुस्तके विक्री, अपने से भी ज्यादा जरुरतमंद तथा दुखी लोगो को ढूँढना, विविध संस्था व उपक्रम को भेंट.

 सुचना: शिबिर की सहभाग  शुल्क : तथा भोजन -निवास व्यवस्था सह सभी प्रकार की व्यवस्था पूर्ण करके ही शिबिर में सहभागी होना चाहिए.
शिबिर शुरू होने के एक घंटा पहले ही शिबिर स्थान पर पहुंचे. शिबिर की समाप्ति के दिन तथा वापस लौटने का पूर्ण व्यवस्था के साथ ही शिबिर की शुरुआत करे.

साथ में आवश्यक वस्तुएं : खुद के कपडे, आवश्यक सामान, दवाई, दो चादरे, स्कार्फ/ टोपी, पानी की बोतल, नोटबुक, पेन, ग्लास, कटोरी, थाली, टूथपेस्ट, साबुन इत्यादि आवश्यक वस्तुए साथ में अवश्य रखे.

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