शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

क्या देखा ?

भीड़ में रिश्तों की इस दिल को अकेला देखा 
 ज़िन्दगी ऐसा भी हमने तेरा चेहरा देखा 
अब तो बंद होने की आँखों को इजाज़त दे दे 
 आँखों ने तेरा जाग कर रस्ता देखा 
उम्र भर साथ चले फिर भी रहे हम तन्हा 
हमने कुर्बत में भी ऐसा फासला देखा 
उस ने बाहो में समां रखे थे दरिया लेकिन 
हमने साहिल को जो देखा भी तो प्यासा देखा

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शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

क्या देखा ?

भीड़ में रिश्तों की इस दिल को अकेला देखा 
 ज़िन्दगी ऐसा भी हमने तेरा चेहरा देखा 
अब तो बंद होने की आँखों को इजाज़त दे दे 
 आँखों ने तेरा जाग कर रस्ता देखा 
उम्र भर साथ चले फिर भी रहे हम तन्हा 
हमने कुर्बत में भी ऐसा फासला देखा 
उस ने बाहो में समां रखे थे दरिया लेकिन 
हमने साहिल को जो देखा भी तो प्यासा देखा

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