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Saturday, May 2, 2026

राजकीय पार्टियों के निशान की राजनीति


 आखिर क्यों ?


कांग्रेस के निशान पंजे में स्वस्तिक भी था । 


अली का पंजा आलीशान, इंदिरा जी का यही निशान यह नारा शायद भारत की होशियार जनता भूल चुकी है ! 


बैल जोड़ी, गाय बछड़ा यह भी कांग्रेस का चुनाव चिन्ह रह चुका है । फिर अल्पसंख्यकों को बुरा न लगे इसलिए बैल गाय बछड़े खूब कटते रहे। 


भारतीय चुनाव आयोग के जनप्रतिनिधि अधिनियम के नियमों के अनुसार शरीर का अंग कभी चुनाव चिन्ह नहीं हो सकता है।


भाजपा का चुनाव चिन्ह दीपक, हलधर किसान, फिर कमल ! 


पार्टियों को चुनाव चिन्ह निर्वाचन आयोग देता है। किसी सलाहकार ने हिंदुओं को बेवकूफ बनाने के लिए इंदिरा गांधी को यह थ्योरी बताई कि कह दीजिए देवरहा बाबा / कांची कामकोटि के शंकराचार्य से यह पंजा निशान आशीर्वाद में मिला है।


फॉरवर्ड ब्लॉक के रूईकर गुट का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा रह चुका है। बाबासाहेब आंबेडकर जी की पार्टी शैडयूल्ड कास्ट फेडरेशन का चुनाव चिन्ह हाथी रह चुका है, निर्वाचन आयोग ने बाद में हाथी बसपा को दे दिया। 


विश्वजीत सिंह

चुनाव विश्लेषक, अभ्यासक

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राजकीय पार्टियों के निशान की राजनीति

8:53:00 PM Reporter: Vishwajeet Singh 0 Responses


 आखिर क्यों ?


कांग्रेस के निशान पंजे में स्वस्तिक भी था । 


अली का पंजा आलीशान, इंदिरा जी का यही निशान यह नारा शायद भारत की होशियार जनता भूल चुकी है ! 


बैल जोड़ी, गाय बछड़ा यह भी कांग्रेस का चुनाव चिन्ह रह चुका है । फिर अल्पसंख्यकों को बुरा न लगे इसलिए बैल गाय बछड़े खूब कटते रहे। 


भारतीय चुनाव आयोग के जनप्रतिनिधि अधिनियम के नियमों के अनुसार शरीर का अंग कभी चुनाव चिन्ह नहीं हो सकता है।


भाजपा का चुनाव चिन्ह दीपक, हलधर किसान, फिर कमल ! 


पार्टियों को चुनाव चिन्ह निर्वाचन आयोग देता है। किसी सलाहकार ने हिंदुओं को बेवकूफ बनाने के लिए इंदिरा गांधी को यह थ्योरी बताई कि कह दीजिए देवरहा बाबा / कांची कामकोटि के शंकराचार्य से यह पंजा निशान आशीर्वाद में मिला है।


फॉरवर्ड ब्लॉक के रूईकर गुट का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा रह चुका है। बाबासाहेब आंबेडकर जी की पार्टी शैडयूल्ड कास्ट फेडरेशन का चुनाव चिन्ह हाथी रह चुका है, निर्वाचन आयोग ने बाद में हाथी बसपा को दे दिया। 


विश्वजीत सिंह

चुनाव विश्लेषक, अभ्यासक


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